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• Sat, 6 Jul 2024 12:02 pm IST


ऋषि सुनक ही नहीं टीम इंडिया भी छीन रही अंग्रेजों की खुशियां


आंखों की गुस्ताखियों की तरह होंठों की शरारत भी छुपती नहीं। इंग्लैंड क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन और माइकल अर्थटन जब T-20 विश्व कप के दूसरे सेमीफाइनल में टीम इंडिया की हार की भविष्यवाणी कर रहे थे, तब उनकी चेहरे पर आई मुस्कान को होंठों के कोरों पर धकेलने की असफल कोशिश साफ समझ आ रही थी।

इतिहास का हवाला

बड़े ही आत्मविश्वास के साथ क्रिकेट के दोनों महारथियों ने ऐलान कर दिया था कि फाइनल होगा इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के बीच। उनके भरोसे की बुनियाद थी भारत का पिछले एक दशक में ICC इवेंट्स के नॉकआउट मुकाबलों में हार का सिलसिला और पिछले T-20 विश्व कप के सेमीफाइनल में टीम इंडिया पर मिली 10 विकेटों की एकतरफा जीत।

कितना बड़ा दुख

भविष्यवाणी सच तो हुई, लेकिन आधी। मुस्कान गायब हो चुकी है पूरे इंग्लैंड की। अब उसकी जगह खिसियाई हंसी निकल रही है, जो कह रही है कि हम लोग बहुत खराब खेले, कि पिच भारतीयों के मुफीद थी, वगैरह। एक और पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने इंटरनैशनल क्रिकेट काउंसिल की ओर से भारत को मिलने वाली सहूलियतों की ओर ध्यान खींचा, तो जवाब में रविचंद्रन अश्विन ने X पर ऐसा फॉर्म्युला दिया है, जिसे सॉल्व करने के लिए ऑक्सफर्ड की मदद लेनी पड़ जाएगी। लेकिन, बात चिढ़ने की नहीं है। अंग्रेजों का दुख समझा जा सकता है, जो खत्म होने का नाम ही नहीं लेता। जब भी बेचारे खुश होने की कोशिश करते हैं, कोई भारतीय आकर कान ऐंठ जाता है। क्या ऋषि सुनक का खौफ कम था उन पर, जो टीम इंडिया भी राशन-पानी लेकर चढ़ी हुई है।

सबसे बड़ा डर

इंग्लिश कंमेंटेटर्स और क्रिकेट एक्सपर्ट्स की एनालिसिस देखकर इतना समझ आ जाता है कि उन्हें दुनिया में इससे बढ़कर दूसरा कोई डर नहीं लगता कि उनकी टीम खेल के मैदान पर भारत से हार जाए। उनके लिए यह पचाना बहुत मुश्किल है कि जिस देश को उनके पूर्वजों ने क्रिकेट खेलना सिखाया अब वही उन्हें पटखनी दे रहा है। कहां तो क्रिकेट की दुनिया चलती थी लॉर्ड्स से और कहां भारत उसे खींचकर BCCI ऑफिस ले आया। एडमिनिस्ट्रेशन हाथ से गया ही, खेल भी हाथ से जा रहा है।

भारत का बैजबॉल

इंग्लिश टीम जब भी अपना रुआब जमाने की कोशिश करती है तभी भारतीय टीम मॉनिटर की तरह आकर क्लास से बाहर निकाल देती है। इस साल की शुरुआत में बैजबॉल का परचम थामकर अंग्रेज भारत पहुंचे थे। तब यह चर्चा आम थी कि इंग्लैंड ने टेस्ट क्रिकेट खेलने का तरीका बदल दिया। लेकिन, भारतीय जमीन पर आते ही क्या हुआ? विशाखापट्टनम से लेकर धर्मशाला तक, बैजबॉल के सारे नट-बोल्ट खोलकर फैला दिए। गयाना में जो हुआ, उसकी तुलना भी उसी हश्र से कर सकते हैं। दोनों परिणामों के बाद इंग्लैंड में चर्चा चल रही है कि अब स्ट्रैटिजी बदलनी चाहिए।

सुनक पर चर्चा

इंग्लैंड के सामने लेकिन संकट है कि भारत को लेकर स्ट्रैटिजी बदले तो कहां-कहां? क्रिकेट के मैदान में, घरेलू राजनीति में, वर्ल्ड इकॉनमी में या कूटनीति में? क्रिकेट में फिर भी 2022 के एडिलेड को याद कर कुछ पल के लिए खुश होने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन बाकियों का क्या करें?

ब्रिटेन की खबर

जिस तरह टीम इंडिया ने इंग्लैंड के अहं को चोट पहुंचाई है, कुछ वैसा ही काम किया है ऋषि सुनक ने भी। Winchester College, ऑक्सफर्ड और स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट, महारानी से भी ज्यादा दौलत के मालिक और अक्षता मूर्ति जैसी शख्सियत के पति हैं सुनक। जब वह पीएम बनने वाले थे तो एक बहस यह भी थी कि वह तो पूरे ब्रिटिश भी नहीं। लेकिन, वही आधा-अधूरा ब्रिटिश करीब दो साल से ब्रिटेन की सबसे ज्यादा खबर ले रहा है।

गलत शॉट

गयाना में हुए सेमीफाइनल में अक्षर पटेल की पहली ही बॉल को अंग्रेज कप्तान जोस बटलर रिवर्स स्वीप करने चले गए और विकेट गंवा बैठे। ऋषि सुनक वहां पीएम हाउस में बैठकर रोज रिवर्स स्वीप खेल रहे हैं और उनकी कंजर्वेटिव पार्टी का विकेट गिरता जा रहा है। ऋषि सुनक यह सब जानबूझकर नहीं करते, उनसे बस हो जाता है।

नाकाम पीएम

अब इसमें उनकी क्या गलती कि उनके आने के बाद महंगाई दर 11% के पार चली गई और अगले सात महीनों तक दो अंकों के बीच टिकी रही। इसमें भी उनकी कोई गलती नहीं कि उनके आने के बाद ही ब्रिटेन को कास्ट ऑफ लिविंग क्राइसिस से जूझना पड़ा, जिससे आम लोगों के living standards में गिरावट आई, साथ ही बिजली के बिल बढ़कर आने लगे। भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट न होने और रवांडा प्लान फेल होने के पीछे भी सुनक की क्या गलती? लेकिन, जनता उनके पीछे ऐसा हाथ धोकर पड़ी है कि उनके जूतों से लेकर घर में इस्तेमाल होने वाले टी सेट तक पर क्रिटिकल हुए जा रही है।

रहम की जरूरत 

दुनिया की पिच रफ हो चुकी है और भारत की स्पिन का ब्रिटेन के पास जवाब नहीं। उसकी अर्थव्यवस्था को टॉप 5 से बाहर निकाल कर हम पहले ही वहां काबिज हो चुके हैं। उस पर इतने सारे झटके – रहम के लिए भी नहीं कह पा रहे अंग्रेज। वहां के मीडिया ने 4 जुलाई को होने वाली वोटिंग से पहले सुनक को नाम दिया है tetchy Rishi यानी चिड़चिड़े ऋषि। लेकिन लगता है कि भारत के खौफ ने चिड़चिड़ा ब्रिटेन को बना दिया है।

सौजन्य से : नवभारत टाइम्स