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• Mon, 16 Oct 2023 1:52 pm IST


क्या ओलंपिक में दिखेगा एशियन गेम्स का जादू?


चीन में हुए एशियाई खेलों में भारत के शानदार प्रदर्शन से देश में खुशी का माहौल है। भारत ने एशियाई खेलों में पहली बार सौ पदकों का आंकड़ा पार किया है। इनमें 28 स्वर्ण, 38 रजत और 41 कांस्य पदक हैं। पांच साल पहले जकार्ता में भारत ने 16 स्वर्ण सहित 70 पदक जीते थे। इस बार भारत ने 37 पदकों का इजाफा किया है। अब नजरें अगले साल पेरिस में होने वाले ओलिंपिक पर लगी हैं। वैसे, एशियाई खेलों में अच्छे प्रदर्शन को ओलिंपिक में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीदों का आधार नहीं बनाया जा सकता, फिर भी पेरिस में तोक्यो से बेहतर प्रदर्शन की संभावना तो है ही।

कई खेल ओलिंपिक में नहीं: एशियाई खेलों में इस बार भारत ने 28 स्वर्ण पदक जीते हैं, जिनमें 16 उन खेलों से जुड़े हैं, जिनका ओलिंपिक में आयोजन ही नहीं होता है। जिन 12 स्वर्ण पदक जीतने वालों की स्पर्धाएं ओलिंपिक में होती हैं, उनमें से ज्यादातर में खिलाड़ियों का ओलिंपिक में पदक जीतने लायक प्रदर्शन नहीं है।

– निशानेबाजी को लें, तो भारत के लिए सिर्फ सिफ्त कौर और पलक गुलिया ने निशानेबाजी की व्यक्तिगत स्पर्धाओं में स्वर्ण जीते हैं। इन दोनों को ही पेरिस ओलिंपिक में पदक जीतने का दावेदार माना जा सकता है।

ओलिंपिक खेलों में रिकर्व वर्ग का आयोजन होता है, जिसमें भारत का प्रदर्शन बहुत कमजोर रहा।
तीरंदाजी में पांचों स्वर्ण पदक कंपाउंड तीरंदाजी में आए हैं। इसका ओलिंपिक में आयोजन ही नहीं होता है।
यह बर्लिन विश्व चैंपियनशिप के बाद दूसरी क्वॉलिफाइंग प्रतियोगिता थी। लेकिन भारत का कोई भी तीरंदाज अभी तक ओलिंपिक में खेलने की पात्रता हासिल नहीं कर सका है।
जिनसे हैं उम्मीदें: कुछ खिलाड़ियों ने उम्मीदें भी जगाई हैं।

भारत ने एथलेटिक्स में सबसे ज्यादा 29 पदक जुटाए हैं। इनमें जेवलिन थ्रोअर जोड़ी नीरज चोपड़ा, किशोर जेना के अलावा महिला जैवलिन थ्रोअर अन्नू रानी और लॉन्ग जंपर मुरली श्रीशंकर ओलिंपिक में पदक के दावेदार नजर आते हैं।
किशोर जेना ने पिछले गोल्ड वाले प्रदर्शन से मात्र 0.4 मीटर ही कमजोर प्रदर्शन किया है। एक साल पहले तक जेना 78.5 मीटर तक का प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन चीन के हांगझोउ में वह 87.54 मीटर के थ्रो से रजत पदक जीते हैं। उनसे और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा सकती है।
बैडमिंटन में सात्विक साईराज-चिराग शेट्टी की जोड़ी से ओलिंपिक में धमाके की उम्मीद की जा सकती है। सात्विक साईराज और चिराग शेट्टी की जोड़ी हांगझोउ में पुरुष युगल का स्वर्ण पदक जीतकर वैसे भी विश्व रैंकिंग में नंबर एक पर पहुंच गई है।
ओलिंपिक में भारत के लिए मुक्केबाज और पहलवान भी पदक लाते रहे हैं। लेकिन इस बार एशियाई खेलों में इन दोनों में भारतीय प्रदर्शन उम्मीदों से कमजोर रहा है। कुश्ती में तो पहलवानों और कुश्ती संघ के पदाधिकारियों के बीच चले लंबे संघर्ष को खराब प्रदर्शन की वजह माना जा सकता है। मुक्केबाजी भी विवादों में रही है। ओलिंपिक शुरू होने में करीब 10 महीने बाकी हैं। इस दौरान इन दोनों खेलों में तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया जाए तो स्थिति सुधर सकती है।

खत्म होगा सूखा: हांगझोउ में भारत ने यंग ब्रिगेड उतारी, जिसमें एक अच्छी बात यह रही कि भारत के युवा निशानेबाज दबाव में बिखरते नजर नहीं आए। अतीत में यह भारत की प्रमुख कमजोरी रही है। यह बदलाव हाई परफॉरमेंस कोच पियरे डेसचैंप्स की वजह से आया है। डेसचैंप्स ने राजधानी दिल्ली स्थित तुगलकाबाद शूटिंग रेंज में वॉर रूम की स्थापना की है। इस वॉर रूम में मॉनिटर्स और प्रॉजेक्टरों से प्रतियोगिता वाली शूटिंग रेंजों जैसा माहौल बनाया जाता है। खिलाड़ियों का विश्लेषण करने के लिए उनके शरीर से उच्च तकनीक वाली डिवाइस जोड़कर देखा जाता है कि उनकी मसल्स कैसे काम कर रही हैं, दिमागी सेल्स की गतिविधियां कैसी चल रहीं हैं, पल्स रेट कितनी है और सांस किस तरह से आ रही है। इस दौरान खिलाड़ी के साथ कोच, मनोवैज्ञानिक के अलावा अन्य सपोर्टिंग स्टाफ भी मौजूद रहता है। इससे खिलाड़ी जान पाता है कि वह अपने को किस तरह से संतुलित रखे। इसी तरह तैयारी चलती रही तो ओलिंपिक पदकों की संख्या में भी तेज इजाफा देखने को मिल सकता है।

सौजन्य से : नवभारत टाइम्स