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• Tue, 11 May 2021 4:28 pm IST


आप अपने बच्चों को कितना जानते हैं?


कोरोना के इस कठिन काल में बहुत कुछ बदला है. घर-परिवार का माहौल भी और समाज का भी. अब परेशान सब हैं. इस बीच मेरी मुलाकात कुछ ऐसे पैरेंट्स से हुई जो अपने बच्चों के लिए कुछ भी करने पर आमादा हैं. वे हर हाल में उन्हें तरक्की के रास्ते पर चलते हुए देखना चाहते हैं.

ऐसा करने के लिए वे किसी भी स्तर का त्याग, तपस्या करने को तैयार हैं. ये सभी सरकारी नौकरी में हैं और अच्छी शिक्षा-दीक्षा के लिए बच्चों को लखनऊ में किराए के घरों में रखे हुए हैं. सभी के बच्चे छठीं से लेकर नौवीं कक्षा में हैं. उनका कंसर्न देखकर मुझे बहुत खुशी हुई. पैरेंट्स का इस तरह केयरिंग होना निश्चित ही अच्छी बात है. इनके परिणाम भी बेहतरीन ही आएंगे, ऐसा मैं देख और महसूस कर पा रहा हूं.


बच्चों के साथ समय बिताना जरूरी
अलग-अलग हुई मुलाकातों में मैंने सभी से पूछा कि अभी आप अपने बच्चों को कितना समय देते हो? सबने कहा- पूरा समय दे रहे हैं. मेरा प्रतिप्रश्न था- बीते हुए कल के बारे में मुझे बताइए. एक ने कहा- छुट्टी पर आया हूं तो थोड़ी देर तक सो गया. उठा तो बच्चे स्कूल चले गए थे. शाम को जब वे लौटे तब मैं कुछ दोस्तों के साथ घर में ही था. बोले, कभी-कभी ही आना होता है तो रिश्तों का ध्यान भी रखना पड़ता है.

फिर शाम को हम सब सिनेमा चले गए. बाहर खाना खाया और लौटकर आए तो 11 बज चुके थे. बच्चों को जल्दी सुला दिया, क्योंकि उनका सुबह स्कूल था. मैंने कहा- यह सब तो अच्छा है. करना भी चाहिए. लेकिन इसमें बेटे-बेटी का एक पिता से कितना और किस तरह का संवाद हुआ. जवाब मिला- बिल्कुल नहीं. बस खुशी इस बात की है कि परिवार ने एक साथ सिनेमा देखा. एक साथ बाहर खाना खाया. इन सभी बच्चों की अपनी मम्मियों से ठीक-ठाक बातचीत है.