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DevBhoomi Insider Desk
• Thu, 4 Aug 2022 1:46 pm IST


निजी अस्पतालों पर निर्भर हैं 65% मरीज, रेफरल सेंटर बने देहरादून के सरकारी अस्पताल


उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में 80% हिस्सेदारी सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की है. इसके बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से देहरादून काफी हद तक निजी स्वास्थ्य संस्थानों पर निर्भर है. आसान शब्दों में कहें तो पिछले 22 सालों में उत्तराखंड स्वास्थ्य के क्षेत्र में जितना भी विकास कर पाया, उसमें अधिकतर सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं देहरादून में ही खड़ी की गई हैं. बड़ी बात यह भी है कि देहरादून के शहरी क्षेत्र को छोड़कर बाकी इलाकों में हालात कुछ खास ठीक नहीं दिखते. बस गनीमत यह है कि निजी क्षेत्रों ने मोर्चा संभाल कर देहरादून वासियों की तबीयत को नासाज होने से बचाया हुआ है. उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों को रेफरल सेंटर कहा जाए तो शायद गलत नहीं होगा. गिनती के इक्का-दुक्का सरकारी अस्पताल ही हैं, जहां कुछ छोटे ऑपरेशन और गिनती की बीमारी का इलाज किया जा रहा है. देहरादून में दून मेडिकल कॉलेज और ऋषिकेश स्थित भारत सरकार के एम्स पर ही इस लिहाज से सबसे बड़ी जिम्मेदारी है. वह बात अलग है कि यहां पर मरीजों का भारी दबाव होने के चलते अधिकतर मरीजों को निजी स्वास्थ्य संस्थानों की तरफ रुख करना पड़ता है.