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DevBhoomi Insider Desk
• Fri, 23 Dec 2022 6:30 am IST


सितारों के चार शुभ योगों के साथ आज मनाई जाएगी पौष अमावस्या, पिंडदान और श्राद्ध करने से पितर होते हैं तृप्त


पौष महीने की अमावस्या आज शुक्रवार को है। अमावस्या के स्वामी पितर हैं। इसलिए पितरों की शांति के लिए इस दिन स्नान-दान और श्राद्ध किया जाता है। वहीं पौष मास के दौरान सूर्यदेव की उपासना भी खासतौर से की जाती है। इसलिए पौष महीने की अमावस्या पर उगते हुए सूरज को जल चढ़ाने की परंपरा है। धर्मग्रंथों के अनुसार ऐसा करने से हर तरह की शारीरिक परेशानियां दूर होती हैं। इस दिन व्रत रखने से उम्र भी बढ़ती है। इस अमावस्या पर सितारों का विशेष संयोग भी बन रहा है। जिससे इस पर्व पर किए गए स्नान-दान और शुभ कामों का पुण्य और बढ़ जाएगा।

पौष अमावस्या पूजा विधि 
पौष अमावस्या पर सुबह जल्दी तांबे के बर्तन में शुद्ध जल, लाल चंदन और लाल रंग के फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए। इसके बाद पीपल के पेड़ का पूजन करना चाहिए और तुलसी के पौधे की परिक्रमा करनी चाहिए। इस दिन पितरों की शांति के लिए उपवास करना चाहिए और जरूरतमंद लोगों को दान-दक्षिणा देना चाहिए।

ग्रह-नक्षत्रों का विशेष संयोग
23 दिसंबर, शुक्रवार को मूल नक्षत्र होने से स्थिर नाम का शुभ योग बनेगा। वहीं, धनु राशि में चतुर्ग्रही योग बनेगा। इस राशि में सूर्य, चंद्र, बुध और शुक्र रहेंगे। जिससे बुधादित्य और लक्ष्मीनारायण नाम के दो शुभ योग बनेंगे। साथ ही गुरु और शनि भी खुद की राशियों में रहेंगे। सितारों की ये स्थिति किए गए शुभ कामों का पुण्य फल कई गुना बढ़ा देगी। ज्योतिष के संहिता स्कंध के मुताबिक, शुभ दिनों में पड़ने वाली अमावस्या शुभ फल देने वाली होती है। इसलिए शुक्रवार को अमावस्या होने से ये दिन सिद्धि देने वाला माना गया है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि शुक्रवार को पड़ने वाली इस अमावस्या पर पितरों की विशेष पूजा की जाए तो परिवार के रोग, शोक और दोष खत्म हो जाते हैं। इस दिन जरुरतमंद लोगों को कपड़ों का दान करने से समृद्धि और सौभाग्य बढ़ता है।

पौष अमावस्या का महत्व
हिन्दू धर्म ग्रन्थों में पौष मास को बहुत ही पुण्य फलदायी बताया गया है। इस अमावस्या पर किए गए व्रत और दान के प्रभाव से हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं। मान्यता है कि पौष अमावस्या का व्रत करने से पितरों को शांति मिलती है और मनुष्य की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। पौष अमावस्या पर पितरों की शांति के लिए उपवास रखने से न केवल पितृगण बल्कि ब्रह्मा, इंद्र, सूर्य, अग्नि, वायु, ऋषि, पशु-पक्षी समेत भूत प्राणी भी तृप्त होकर प्रसन्न होते हैं। पौष मास में होने वाले मौसम परिवर्तन के आधार पर आने वाले साल में होने वाली बारिश का अनुमान लगाया जाता है।