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DevBhoomi Insider Desk
• Mon, 20 Dec 2021 3:25 pm IST


क्या विराट पर बोर्ड से गलती हुई


विराट कोहली और रोहित शर्मा के संबंधों की खटास को लेकर दोनों खिलाड़ियों की सफाई आने के बाद भी यह गुत्थी और उलझती नजर आ रही है। रोहित शर्मा को टी-20 टीम का कप्तान बनाते समय ही विराट कोहली को इस बात का अहसास हो गया होगा कि देर-सबेर वनडे की कप्तानी भी उनके हाथों से जाने वाली है। विराट कोहली को वनडे कप्तानी से हटाने से शायद ही किसी को एतराज होगा। आखिर उनके ऊपर कोई भी आईसीसी ट्रॉफी न जीत पाने का ठप्पा लगा हुआ है। लेकिन इस मामले को जिस तरह से बीसीसीआई ने हैंडल किया, उससे यह गुत्थी ज्यादा उलझी है।

बोर्ड अपनी करता है

चोटिल होने की वजह से दक्षिण अफ्रीकी दौरे की टेस्ट टीम से रोहित शर्मा के हटने के बाद इस मामले को जैसा मोड़ दिया गया, वह निश्चय ही गलत है। रोहित के टेस्ट टीम से हटने के बाद यह खबर हवा में तैरी कि विराट कोहली वनडे सीरीज के लिए उपलब्ध नहीं रहेंगे और यह उन्होंने बीसीसीआई को बता दिया है। सूत्रों के हवाले से चलाई गई इस खबर का मतलब यह निकाला गया कि विराट और रोहित एक-दूसरे की कप्तानी में खेलने को तैयार नहीं हैं। सचाई का पता लगाए बगैर तमाम पूर्व खिलाड़ी प्रतिक्रिया भी देने लगे। बाद में विराट कोहली ने बताया कि उन्होंने तो वनडे सीरीज से हटने के लिए बीसीसीआई को लिखा ही नहीं है। इससे लगता है कि बीसीसीआई से जुड़े किसी व्यक्ति ने जानबूझकर यह झूठी खबर फैलाई।
विराट कोहली के यह कहने से कि टी-20 की कप्तानी छोड़ते समय किसी बोर्ड अधिकारी ने उनसे फैसले पर दोबारा सोचने को नहीं कहा था, बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लग गया है। उनके मुताबिक विराट को टी-20 की कप्तानी नहीं छोड़ने के लिए कहा गया था, लेकिन वह राजी नहीं हुए। इसलिए बीसीसीआई और चयनसमिति को उन्हें वनडे की कप्तानी से हटाना पड़ा क्योंकि वनडे और टी-20 दोनों ही वाइट बॉल फॉरमैट में आते हैं। सवाल यह है कि यदि बीसीसीआई और चयन समिति ‘एक फॉरमैट, एक कप्तान’ के लॉजिक में विश्वास करता है तो रोहित को टी-20 का कप्तान बनाते समय ही वनडे का भी कप्तान क्यों नहीं बनाया गया?

आम तौर पर माना जाता है कि बीसीसीआई से करार वाले खिलाड़ी उसके खिलाफ बयान नहीं दे सकते हैं। लेकिन विराट ने कोई बयान तो दिया नहीं है। दौरे पर रवाना होने से पहले अधिकृत संवाददाता सम्मेलन में पूछे गए सवालों के जवाब दिए हैं। यह भी कहा जा रहा है कि विराट से टी-20 कप्तानी न छोड़ने की बात पांच चयनकर्ताओं और तीन बीसीसीआई अधिकारियों के सामने की गई थी, लेकिन बोर्ड इस बारे में कोई बयान जारी करता है तो कप्तान झूठे साबित होंगे, जिसका टीम के मनोबल पर प्रभाव पड़ेगा। इसलिए बीसीसीआई ने फिलहाल इस मामले को तूल न देने का फैसला किया है।

विराट कोहली 2014 में ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर धोनी के कप्तानी छोड़ने पर टेस्ट कप्तान बने और 2017 में उन्हें तीनों प्रारूप का कप्तान बनाया गया। यह वह दौर था, जब बीसीसीआई का संचालन सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विनोद राय की अध्यक्षता वाली प्रशासकों की समिति के हाथों में था। इस दौर में विराट कोहली को फ्री हैंड दिया गया। धीरे-धीरे उनका कद इतना बड़ा हो गया कि उनके फैसलों के आगे बीसीसीआई भी झुका नजर आता था। उन्होंने कई मौकों पर मनमाने फैसले भी किए, जिनकी आलोचना हुई।

बहरहाल, बीसीसीआई का इतिहास गवाह है कि उसने हमेशा अपने को सर्वोपरि रखा है। इस कारण तमाम बार ताश के पत्तों को फेटने की तरह कप्तान बनाए और हटाए गए। उदाहरण के लिए, आरके पटेल 1958 से 1960 तक बीसीसीआई के अध्यक्ष रहे थे। उनके कार्यकाल में एक साल में पांच कप्तान बना दिए गए थे। ये कप्तान थे- पॉली उमरीगर, गुलाम अली, वीनू मांकड, हेमू अधिकारी और डीके गायकवाड़।

भारत का 1971 का ऐतिहासिक वेस्टइंडीज दौरा खेलप्रेमियों को अच्छे से याद होगा। इस दौरे पर भारत ने वेस्ट इंडीज के खिलाफ उसके घर में पहली बार सीरीज जीती थी। इस दौरे के लिए कप्तान का चयन जिस तरह से हुआ, वह गजब ही था। मंसूर अली खां पटौदी का कप्तान के तौर पर जाना लगभग तय था। लेकिन आखिरी पलों में कप्तान बनाया गया अजित वाडेकर को। वाडेकर अपनी पत्नी के साथ सब्जी खरीदने बाजार गए थे। घर लौटने पर पत्रकारों का जमावड़ा देखा और तब पूछने पर मालूम हुआ कि उन्हें कप्तान बना दिया गया है। साल 1975 में तो फारूख इंजीनियर टॉस के लिए जाने वाले थे, पर उन्हें सूचना दी गई कि वेंकट राघवन को कप्तान बना दिया गया है।

लाहौर बनाम कराची

ऐसी घटनाएं सिर्फ भारत में ही नहीं होतीं। पाकिस्तान में आपसी राजनीति की वजह से कई कप्तानों को पद गंवाना पड़ा है। वहां तो यह आलम रहा है कि कराची का कप्तान होने पर लाहौर लॉबी पीछे पड़ जाती थी और लाहौर का कप्तान बनने पर कराची लॉबी उसे हटवाने में लग जाती थी। ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड में जरूर पारदर्शिता है। फिर भी टिम पेन के मामले में क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की गलती उजागर हुई है। बोर्ड इस बात से वाकिफ था कि टिम पेन लड़की को भद्दे संदेश लिख रहे हैं। फिर भी उन्हें कप्तानी से हटाने का फैसला नहीं किया गया। जब इस मामले का भंडाफोड़ हो गया, तभी पेन को कप्तानी से हटाया गया।

जहां तक टीम के परफॉर्मेंस की बात है तो कोच राहुल द्रविड़ गंभीर व्यक्ति हैं। विराट और रोहित दोनों ही उनका सम्मान करते हैं। इसलिए दौरे पर बात और बिगड़ने की आशंका नहीं है। जहां तक इस विवाद की परिणति का सवाल है तो बहुत कुछ टीम और कप्तान के परफॉर्मेंस पर भी निर्भर करेगा। यदि विराट कोहली इस दौरे पर भारत को टेस्ट सीरीज जिताने में कामयाब हो जाते हैं तो मामला रफा-दफा होने की ज्यादा संभावना रहेगी, लेकिन अगर भारत सीरीज में बुरी तरह हारता है तो बहुत संभावना है कि रोहित शर्मा तीनों प्रारूपों में कप्तान नजर आएं।
सौजन्य से - नवभारत टाइम्स