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• Tue, 28 May 2024 12:47 pm IST


जो नहीं हुआ वह भी ब्रह्मांड ने ही किया


जीवन जीना बहुत सरल है। लेकिन हम सोच-सोचकर उसे मुश्किल बना देते हैं। आनंद में रहना बहुत सरल है लेकिन हम अपने ईगो को पकड़े रहकर उसे मुश्किल बना देते हैं। कभी किसी को अगर किसी मृतक को विदा देने श्मशान जाना होता है, तो वह चिता पर जलते शव को देखकर सहज ही सोचने लगता है – क्या जो लेकर आए इस दुनिया में, क्या जो लेकर जाएंगे, फिर इतनी लड़ाई, इतना गुस्सा, इतना तेरा-मेरा किसलिए। हालांकि श्मशान में जाकर बुद्ध के समान यूं मन में वैराग्य पैदा होना बड़ी बात नहीं। सभी के साथ ऐसा होता है। इसे श्मशान वैराग्य कहते हैं7 श्मशान के गेट से बाहर निकलते-निकलते हम पर फिर से संसार हावी हो जाता है। हमें अपने हिसाब-किताब में उलझने में देर नहीं लगती।

क्या आपने कभी गौर किया कि कई बार अपनी मनचाही चीज हासिल न होने पर आपका मन गहरे अवसाद में डूबा जाता है। आपको कुछ भी अच्छा नहीं लगता। वह परिणाम जिसे पाने के लिए आप पिछले कुछ महीनों से, साल भर से तैयारी कर रहे थे, जब समय आया तो वह आपको नहीं मिला। इस नहीं मिलने से आप इतने दुखी हो जाते हैं कि आपको भूख लगना तक बंद हो जाता है। सांस लेना भी भारी लगने लगता है। आपको उस वक्त उन चीजों का जरा भी खयाल नहीं आता जो कि आपके पास होती हैं। आपके जहन में बस एक ही बात रहती है कि आपने जिस चीज की इच्छा की और पूरे मन से इच्छा की वह आपको नहीं मिली।

मनुष्य को प्रकृति ने ऐसा बनाया है कि वह बहुत लंबे समय तक उदास और हताश नहीं रहत सकता। वह अपने लिए कोई न कोई उम्मीद खोज ही लेता है और फिर उस उम्मीद का दामन थाम जिंदगी जीता है। मनचाही चीज न मिलने के बाद कुछ दिन इस न मिलने का मातम बना लेने के उपरांत हम धीरे-धीरे उदासी और निराशा के घेरे से बाहर निकल आते हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि कुछ समय बाद ही हमें मनचाही चीज से कोई बड़ी चीज हासिल हो जाती है। आपको दुख हो रहा था कि आप बैंक के पीओ का एग्जाम नहीं पास कर पाए और एक साल बात आप सिविल सर्विसेज पास कर लेते हो।

कहां आप बैंक का प्रोबेशनरी ऑफिसर न बन पाने का दुख मना रहे थे और कहां आप आईएएस ऑफिसर बन जाते हो। जाहिर है कि अगर आप पीओ बन जाते, तो आप आईएएस नहीं बनते। यानी आपने तो पीओ बनने का सोच रखा था लेकिन ब्रह्मांड आपको आईएएस अधिकारी बनाना चाहता था। अब क्योंकि आप खुद तो आईएएस बनना नहीं चाह रहे थे, तो इसीलिए उसने आपको पीओ में फेल किया। यानी जो हुआ वह तो ब्रह्मांड ने किया ही, जो नहीं हुआ वह भी ब्रह्मांड ने ही किया।
असल में अगर आप जीवन में प्रसन्न रहना चाहते हैं, आनंद के परम भाव में जीना चाहते हैं, तो आपको पाने और खोने से तो ऊपर उठना ही होगा क्योंकि सच यही है कि आप कुछ भी लेकर नहीं आए और कुछ भी लेकर नहीं जाओगे। लेकिन आपने चूंकि मनुष्य योनि में जन्म लिया है आपमें यह काबिलियत है, यह सामर्थ्य और संभावना है कि आप बिना वजह के ही अतीव आनंद में जीवन जी सकते हो।

जिस परमात्मा ने आपको जन्म दिया है, जो परम शक्ति आपको इस संसार में लाई है, उसने इसकी बखूब व्यवस्था की हुई है कि आप अकारण भी आनंद में बने रहो। स्वयं प्रकृति हमेशा आनंद में बनी रहती है। ब्रह्मांड की डिफॉल्ट स्थिति आनंद की स्थिति है। ब्रह्मांड हमेशा ही जीवन के पक्ष में, सकारात्मकता के पक्ष में झुका हुआ रहता है। इसलिए अगर आप ब्रह्मांड से खुद को जोड़े रह सको, तो आप भी हमेशा वसी ही आनंद की स्थिति में बने रह सकते हो। ब्रह्मांड से आशय परम शक्ति से है। जैसे ही आप स्वयं को परम शक्ति से जोड़ते हैं, आप अपनी छोटी इंसानी सीमाओं से मुक्त होकर उसकी असीमित शक्तियों से जुड़ जाते हैं। ऐसा होते ही आप मनचाही चीज के न होने पर भी उदास या निराश होना छोड़ देते हैं क्योंकि अब आपमें पाने की चाह पैदा करने वाली कोई चीज ही नहीं रह जाती।

सौजन्य से : नवभारत टाइम्स