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DevBhoomi Insider Desk
• Thu, 2 Dec 2021 3:18 pm IST


हम जैसा सोचते हैं, वैसा ही हो जाता है


सुबह-सुबह हमें सबका शुक्रिया करना चाहिए। सबसे पहले परमात्मा का जिनकी शक्ति और दुआओं से हम सुरक्षित हैं। फिर अपने शरीर और मन का जो स्वस्थ है। शुक्रिया करें अपने काम और साथ में काम करनेवाले साथियों का। धन्यवाद करें प्रकृति का, जिसने हमें जीवित रखा हुआ है। इस तरह शुक्रिया अदा करके हम पॉजिटिव और शक्तिशाली वाइब्रेशन फैलाते हैं। खुद के लिए और सबके लिए सुरक्षा का कवच बनाते हैं।

जीवन और सृष्टि को स्वस्थ व सुरक्षित रखने के लिए सुबह उठने के बाद 10 सुनहरे संकल्पों को ध्यानपूर्वक अपनाएं। उन्हें हर दिन दोहराते रहें जिससे वह सिद्ध और साकार होंगे।

1. मैं पॉजिटिव और पावरफुल आत्मा हूं। यह न सोचें कि मुझे शक्तिशाली होना है या होना चाहिए। मैं पॉजिटिव और शक्तिशाली हूं। मुझ पर किसी नेगेटिव चीज या बातों का असर नहीं है।

2. मैं एक शांत स्वरूप आत्मा हूं। मुझमें भरपूर शांति की शक्ति होने की वजह से ईर्ष्या, घृणा और गुस्सा आदि मन के विकार और कोरोना जैसे तन के वायरस खत्म पड़े हैं।

3. मैं एक निर्भय आत्मा हूं। आसपास फैले डर के वातावरण का मेरे ऊपर कोई असर नहीं पड़ सकता है।

4. मेरा शरीर स्वस्थ और निरोगी है और हमेशा ऐसा ही रहेगा। ऐसे अच्छे संकल्प करने से कमजोर सोच खत्म हो जाएगी।

5. पांचवां संकल्प करें और अंतरमन में देखें। यह देखें कि परमात्मा की शक्ति और दुआओं का आभामंडल मेरे चारों ओर सुरक्षाकवच के रूप में मौजूद है। यह मुझे सभी नकारात्मक और नुकसान देने वाले तत्वों से दूर रखता है।

6. मेरी यह सकारात्मक सोच कि सुरक्षाकवच इतना शक्तिशाली है कि कोई भी नकारात्मक बातें, बोल या व्यवहार इस आभामंडल को भेदकर मेरे अंदर प्रवेश नहीं कर सकती। जैसे लोहा, लोहे को काटता है, ऐसे मेरी सबके लिए शुभ भावना व सद्भावना मुझे सभी प्रकार के अशुभ तत्वों से बचाएगी। ऐसा इसलिए क्योंकि सकारात्मक सोच की एनर्जी, नेगेटिव एनर्जी से कई गुणा शक्तिशाली है।

7. परम शक्ति और वरदानों का यह सुरक्षाकवच मेरे परिवार, बच्चों, माता-पिता, पति-पत्नी सबके चारों तरफ फैला हुआ है। इसके भीतर सब सुरक्षित हैं। कोई भी चिंता, भय व निराशा का संकल्प स्वीकार नहीं करें क्योंकि संकल्प से सिद्धि होती है। इसलिए जरूरी है, हर सोच, बोल और कर्म को ध्यान से अपनाएं। सदा शुभ-शुभ सोचे और शुभ-शुभ बोलें। जो आप होना या बनना चाहते हैं, सिर्फ वही सोचें या बोलें।

8. परमात्मा की शक्तियां और वरदान मेरे बिज़नेस व कारोबार को संभाल रहे हैं। हमेशा यह सोचें कि मेरे पास सब कुछ है, मैं भरपूर हूं। कभी नहीं सोचना कि किसी तरह की कमी आ गई है या मेरा बिज़नेस कम चल रहा है। अगर ऐसा सोचेंगे या बोलेंगे तो वही हो जाएगा। अगर कोई पूछे कारोबार कैसा चल रहा है तो कहें कि हम बढ़िया हैं और हमारा काम भी बहुत बढ़िया चल रहा है। हम जो सोचते और बोलते हैं, वही हो जाता है। कभी भी ‘नहीं है या कमी है’ जैसे शब्द इस्तेमाल नहीं करना। यह नहीं सोचना या बोलना कि मेरे पास समय, धन या संसाधन की कमी है। बल्कि यह संकल्प करना कि मेरे पास बहुत कुछ है। मेरा इस साल का बिजनेस अब तक का बेस्ट होने वाला है।

9. ऐसी कल्पना करें कि परमात्मा का यह सुरक्षाकवच सृष्टि के चारों ओर फैला हुआ है। पूरे विश्व को सेहत और सुरक्षा की ऊर्जा दे रहा है।

10. सृष्टि में जो महामारी जैसी चीज आई थी, वह चली गई। फिर कभी नहीं आएगी। यह नहीं सोचना कि कुछ महीने या साल लगेंगे, बल्कि यह सोचना है कि कोरोना खत्म हो चुका है। अगर करोड़ों लोग यही मानेंगे या कहेंगे कि सब कुछ ठीक हो गया है तो वास्तव में सब ठीक हो जाएगा। अगर सारे यही सोचेंगे कि एक या दो साल लगेंगे तो ऐसा ही होगा। इसलिए सभी यही संकल्प लें कि जो महामारी आई थी वह खत्म हो गई है और फिर नहीं आएगी तो ऐसा ही होगा।


लेखिकाः ब्रह्मकुमारी शिवानी