दान में मिली जमीनों को खुर्द बंद कर खेला जा रहा अरबों रुपए का खेल
हरिद्वार। मोह माया को त्यागने और विरक्ति का संदेश देने वाले भगवा वस्त्र धारण करने वाले संत समाज में से कईयों पर इस समय व्यवहार के विपरीत मोह माया लोभ और लिप्सा पूरी तरह हावी हो गई है। मोह माया को त्यागने का जो संदेश देने के लिए यह संत महात्मा बने वापस उसी में फंसते दिखाई दे रहे हैं । हरिद्वार में स्थित कई अखाड़ों और बड़े-बड़े आश्रमों की तो स्थिति ऐसी ही नजर आ रही है। अधिकतर आश्रमों और अखाड़ों में भू माफियाओं का दखल साफ देखा जा सकता है दान में मिली अरबों रुपए की बेशकीमती जमीनों पर कहीं फ्लैट तो कहीं अपार्टमेंट बनाकर अरबों रुपए का खेल खेला जा रहा है।
हालांकि इस परिस्थिति से उत्पन्न होने वाले विकार भी सामने आ रहे हैं और संपत्ति के विवादों के चलते कई संतों के यहां मौत भी हो चुकी है ।
उपनगरी कनखल और हरिद्वार में अधिकतर जमीनें अखाड़ों की ही हैं। करीब दो दशक पहले प्रॉपर्टी डीलरों ने अखाड़ों की इन संपत्तियों से सोना उगलवाने का खेल शुरू किया था जिसके तहत संतों से सांठगांठ कर खाली पड़ी जमीनों पर अपार्टमेंट बनाने का खेल शुरू हुआ था। कुछ अखाड़ों के संतों को तो यह गोरखधंधा बहुत रास आया जिसके चलते कनखल में कई स्थानों पर बहुमंजिला अपार्टमेंट बनाकर बिना रजिस्ट्री कराए और सरकार को समुचित राजस्व दिए बिना ही इनकी बिक्री तेजी से की जा रही है । शहर में 20 से भी ज्यादा ऐसे मिनी सिटी विकसित हो गए हैं जहां हजारों परिवार रह रहे हैं। यह गोरखधंधा लगातार बढ़ता जा रहा है । श्री महंत नरेंद्र गिरि की मौत के बाद यह गोरखधंधा एक बार फिर इसलिए चर्चा का विषय बन गया है। क्योंकि पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए नरेंद्र गिरी के शिष्य आनंद गिरि ने आशंका जताई है कि गुरु जी की मौत के पीछे जमीनों का विवाद बड़ा कारण हो सकता है । हरिद्वार में अखाड़ों और आश्रमों की जमीनों की खरीद फरोख्त लगातार जारी है।
इसी साल संपन्न हुए कुंभ के दौरान भी जगजीतपुर कनखल और उत्तरी हरिद्वार में कई जमीनों की खरीद-फरोख्त की चर्चा लगातार होती रही है। उत्तरी हरिद्वार में तो कुछ प्रभावशाली लोगों ने पुराने आश्रम ध्वस्त कर वहां आलीशान इमारतें बनाकर बेच भी दी हैं। दिन भर भगवा धारियों और प्रॉपर्टी डीलरों का यह गठजोड़ जमीनों के इसी गोरखधंधे से होने वाली कमाई के जोड़ घटाव में जुटा रहता है, हालांकि इस गोरखधंधे से होने वाले दुप्रभाव भी सामने दिखाई देने लगे हैं । कई संतों की हत्या ऐसे ही कारोबार के कारण होने की बातें सामने आती रही हैं। 2017 में लापता हुए बड़ा अखाड़ा के महंत मोहन दास का आज तक पता नहीं चला है और बड़े अखाड़े के ही महंत सुधीर गिरी की एक दशक पहले हुई हत्या के मूल में भी जमीनों के ही विवाद सामने आए थे। कई संत दिन भर जमीनों के विवादों की फाइलें उठाए कोर्ट में घूमते दिखाई देते हैं जगजीतपुर स्थित एक आश्रम की संपत्ति का विवाद भी इन दिनों खासा चर्चित बना हुआ है।
रिपोर्ट-राजेश शर्मा