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• Tue, 16 Jan 2024 12:30 pm IST


आखिर दिल्ली क्रिकेट का यह हाल क्यों है


एक फिल्म में सिविल सर्विसेज का एक नाकाम प्रतिभागी युवाओं को समझाता है कि यह इम्तहान सांप-सीढ़ी के खेल की तरह है। इसमें सांप से बचते हुए और सीढ़ियों से चढ़ते हुए आखिरी खाने तक पहुंचने वाला ही आईएएस बन पाता है। हकीकत है कि कामयाबी के पहाड़ पर ऊपर तक पहुंचने के लिए हर मैदान में ऐसी सलाहियत की जरूरत होती है। खासतौर से क्रिकेट में।

अब दिल्ली का हाल देख लीजिए। सात बार की रणजी चैंपियन टीम को पहली बार एलीट ग्रुप में शामिल पुडुचेरी जैसी छोटी टीम ने बुरी तरह से हरा दिया। दिल्ली क्रिकेट का बुरा हाल चल रहा है। विराट कोहली के बाद भारतीय टीम में शामिल हुए बड़े खिलाड़ियों में सिर्फ ऋषभ पंत का नाम ही इस काबिल है जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाया। अभी हाल यह है कि भारतीय क्रिकेट टीम तो छोड़िए अंडर नाइंटीन तक दिल्ली का एक भी खिलाड़ी नहीं है। यह हाल तब है, जब अंडर नाइंटीन में तीन विश्व चैंपियन टीमों के कप्तान दिल्ली से रहे हैं। यह थे विराट कोहली, उन्मुक्त चंद और यश ढुल। पिछले कुछ साल से दिल्ली को सांप-सीढ़ी के खेल वाला सांप हर बार क्यों काट रहा है? इस कहानी से पहले पुडुचेरी के उस खिलाड़ी की दास्तां, जिसने फिलहाल दिल्ली को इस हाल में पहुंचाया है।

यह खिलाड़ी है, पुडुचेरी के लिए पहली बार खेल रहा 32 साल का गौरव यादव। गौरव पिछले दस साल से क्रिकेट खेल रहे हैं। पहले वह मध्य प्रदेश के लिए क्रिकेट खेलते थे। दस साल में सिर्फ तीस प्रथम श्रेणी मैच खेलने वाले गौरव की सांप-सीढ़ी वाली कहानी में बार-बार सांप काटते रहे और वह फिसलकर करियर की निचली पायदान पर आते रहे। कभी भेदभाव हुआ तो कभी चिकनगुनिया हो गया और कभी एक्सिडेंट। मजेदार बात यह है कि गौरव सीधे खेत में खेलकर इंदौर के मैदान में पहुंचे थे। बिना ग्रुप स्टेज का क्रिकेट खेले। वहां नरेन्द्र हिरवानी की नजर उन पर पड़ी और फिर उन्हें रणजी खेलने का मौका मिला। वर्ष 2021-22 में मध्य प्रदेश चैंपियन बना था और गौरव ने तब टीम की तरफ से सबसे ज्यादा 23 विकेट लिए थे। इसके बावजूद उन्हें आगे अच्छे मौके नहीं मिले तो वेंकटेश प्रसाद की सलाह पर वह पुडुचेरी की टीम से खेलने चले गए। पता यह चला कि मध्य प्रदेश के बड़े खिलाड़ी को न जाने क्यों गौरव अखर रहे थे, इसलिए वह सांप बने हुए थे।

दिल्ली क्रिकेट में भी काफी भेदभाव के मामले सुनने में आते हैं। आईपीएल नीलामी में अर्हता हासिल करने के लिए कम से कम एक रणजी मुकाबला खेलने से प्राथमिकता मिल जाती है। कई बार इसी वजह से नौसिखियों को टीम में निजी फायदों के लिए जगह दे दी जाती है। 2007-08 के बाद से दिल्ली रणजी नहीं जीत पाई है। दिल्ली में हाल यह है कि यहां डीडीसीए के पास अपनी क्रिकेट अकादमी तक नहीं है। दिल्ली देश की राजधानी है। इसका असर पूरे देश पर पड़ता ही है।

हाल ही में दक्षिण अफ्रीका में माइकल वॉन से मार्क वॉ ने पूछा कि इतनी मजबूत बेंच स्ट्रेंथ और शक्तिशाली बीसीसीआई के बावजूद पहला टेस्ट इतनी बुरी तरह से क्यों हारी? उनका जवाब था भारतीय टीम अपनी प्रतिभाओं के हिसाब से मोस्ट अंडर परफॉर्मर है। वॉन को शायद नहीं मालूम कि यहां क्रिकेट के साथ-साथ सांप-सीढ़ी का खेल भी चलता है और यहां बड़े से बड़े परफॉर्मर को कब सांप काट ले, कुछ पता नहीं रहता। बहरहाल हार चाहे दिल्ली की हो या फिर साउथ अफ्रीका में कभी टेस्ट ट्रोफी न उठाने की, बार-बार सांप काटने की वजह समझने के लिए अहमद शनास का यह शेर और बात खत्म कि-

सौजन्य से : नवभारत टाइम्स